पापा, बस घर पहुंच रहा हूं… देर रात बेटे अनुराग के इन शब्दों के बाद जो हुआ, उसने पूरे परिवार की दुनिया उजाड़ दी। कुछ ही घंटों बाद पिता के फोन पर आई एक अनजान कॉल से खुशहाल परिवार में मातम छा गया। मंगलवार रात जीटी करनाल रोड पर हुए बुलेट हादसे में अनुराग, मोहित और सुमित की मौत हो गई। नांगलोई के रहने वाले तीनों बचपन के दोस्त थे।
अनुराग के पिता गोपाल शर्मा ने करीब 11:45 बजे बेटे को कॉल कर घर आने के लिए कहा था। बेटे के यही आखिरी शब्द अब भी पिता के कानों में गूंज रहे हैं। आधी रात को परिवार भागा-भागा जीटी करनाल रोड पहुंचा तो वहां पुलिस के अलावा भीड़ जमा थी। उस समय तक घायल अनुराग, मोहित और सुमित वहीं पड़े थे। परिवार का आरोप है कि पुलिस तीनों को समय पर अस्पताल भेजती तो शायद उनकी जान बच जाती।

2 of 12
हादसे के बाद जलती बुलेट
– फोटो : अमर उजाला
मौसा धीरज मिश्रा ने बताया कि अनुराग परिवार के साथ गली नंबर-18, शिवराम पार्क, नांगलोई में रहता था। परिवार में पिता गोपाल शर्मा के अलावा मां किरन शर्मा और छोटा भाई देव शर्मा है। अनुराग रोहिणी की एक कंपनी में सॉफ्टवेयर डेवलपर की नौकरी कर रहा था। पिता प्राइवेट नौकरी करते हैं। मंगलवार को वह पंजाबी बाग जाने की बात कहकर घर से निकला था। इसके बाद वह मुरथल कैसे पहुंचा परिवार को इसकी जानकारी नहीं है। बेटे की मौत के बाद गोपाल और उनकी पत्नी किरन का रो-रोकर बुरा हाल है।

3 of 12
मृतकों के घर के बाहर शोकाकुल परिजन और पड़ोसी।
– फोटो : अमर उजाला
मोहित परिवार के साथ एच-ब्लॉक, कुंवर सिंह नगर, नांगलोई में रहता था। पिता पूरनचंद की 4 साल पहले मौत हो गई थी। परिवार में दो शादीशुदा बहनें हैं। मोहित किराए के मकान में रहता था और एक एमएनसी में वर्कफ्रॉम होम कर रहा था। बेटे मोहित की मौत के बाद मां बदहवास है। मोहित और अनुराग दोनों चचेरे भाई थे। सुमित का परिवार शिवराम पार्क, नांगलोई में रहता था।

4 of 12
हादसे में क्षतिग्रस्त बुलेट
– फोटो : अमर उजाला
इसके परिवार में पिता मदनलाल के अलावा मां, दो बहनें और एक छोटा भाई राजन है। सुमित के पिता प्राइवेट नौकरी करते हैं। सुमित आईजीएल में पाइप लाइन की मैपिंग का काम करता था। तीनों ही युवक पहले एक ही मोहल्ले में रहते थे और गहरे दोस्त थे।

5 of 12
इसी जगह हुआ था हादसा
– फोटो : अमर उजाला
- परिजन मौके पर पहुंचे तब तक तीनों युवक वहीं पड़े थे लहूलुहान, सामने ही घायलों को भेजा अस्पताल
- परिजनों ने तीनों को देरी से अस्पताल पहुंचाने का पुलिस पर लगाया आरोप, समय से पहुंचते तो शायद बच जाते








